Sunday, 6 January 2013

जय सद्गुरु देव !
मै अपने इस इलेक्ट्रॉनिक डायरी  की शुरुआत अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के इन दिव्य वचनों के साथ करना चाहूँगा |
अद्भुत मारग योग विहंगम, मैं तुमको बतलाऊंगा |
यदि विधिवत तुम साधन करिहों, अमरलोक पहुंचाउंगा ||

2 comments:

  1. जय सद्गुरु देव

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  2. भक्ति का मार्ग सद्गुरु कृपा से ही प्राप्त हो सकता है.आसन, प्राणायाम,भजन, कीर्तन केवल कर्म हैं.बिना अपने स्वरुप को जाने या स्वरुप स्थिति के भक्ति का अर्थ समझा नहीं जा सकता है.

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